1.
तेरा नाम जब दिल में बसा,
तो ऐसा लगा जैसे रुकी हुई साँसों को हवा मिल गई हो,
ना चेहरा देखा था, ना बात हुई थी,
पर तेरी सोच ने मेरी तन्हाई को दवा मिल गई हो...
2.
जब पहली बार तू सामने आई थी,
तो वो ‘लम्हा’ नहीं — कोई 'इबादत' सी लग रही थी...
तू नहीं बोल रही थी, पर तेरी आँखों ने,
मेरे सवालों को जवाब दे दिए थे,
और मैं...
मैं उस जवाब में उम्र गुज़ारने को तैयार था!
3.
तेरी हँसी जब पहली बार कानों तक आई,
तो जैसे पुराने सारे ग़म दफ़न हो गए,
तू कुछ भी नहीं थी उस वक़्त मेरी,
मगर फिर भी सबसे ख़ास हो गई...
4.
तू जब ‘कैसे हो’ लिखती है,
तो लगता है कि सारी कायनात पूछ रही है...
और जब तू ‘miss you’ कहती है,
तो लगता है कि कोई जन्मों पुराना रिश्ता फिर से जाग गया है!
5.
तेरे आने से ये हुआ है कि...
अब हर कविता तेरे नाम पर होती है,
अब हर चाय की चुस्की में तेरा ज़िक्र होता है,
अब हर तन्हा दोपहर में तेरी मुस्कान की धूप उतरती है...
6.
मैंने पढ़ी थीं बहुत प्रेम कहानियाँ,
हीर-रांझा, लैला-मजनूँ, शीरीं-फरहाद...
मगर जब तू मिली,
तो लगा कि पहली बार मोहब्बत जीवित अवस्था में मेरे सामने खड़ी है...
7.
तू मेरे दिन की शुरुआत है,
और मेरी रात का आखिरी ख्वाब...
मैं तुझे माँगता नहीं,
क्योंकि डरता हूँ, कहीं तू ‘क़बूल’ हो गई तो मैं बर्बाद हो जाऊँ!
(तालियाँ...)
8.
तेरी बातों में जो मासूमियत है,
वो मुझे खुद से शर्मिंदा कर देती है...
तू जब चुप होती है,
तो लगता है सारा शहर तेरी आवाज़ ढूंढ रहा है।
9.
तू कोई हुस्न की दुकान नहीं,
तू मेरी आँखों की वो प्यास है जो कभी बुझती नहीं,
तू मेरे सपनों की वो किरदार है,
जो हर कहानी में नायक बन जाती है।
10.
लोग कहते हैं, मोहब्बत वक़्त मांगती है...
मैं कहता हूँ — मोहब्बत वक़्त नहीं,
एक झलक में उम्र बाँध देती है!
(तालियाँ...)
11.
अब तू है, तो सबकुछ है...
तेरे बिना ये ज़िंदगी सिर्फ़ “जीवन” रह जाएगी,
और तेरे साथ —
ये कविता बन जाएगी, संगीत बन जाएगी,
और मैं...
मैं तेरा एक शब्द बन जाऊँगा,
जिसे तू कभी न मिटाएगी...
✨ अंतिम चार पंक्तियाँ (तू मिले या न मिले, पर तेरे होने का एहसास रहे,
मैं लिखता रहूँ तुझे, और हर अल्फ़ाज़ में तू पास रहे।
तेरी मोहब्बत मेरी तालीम है, मेरा धर्म है, मेरा विश्वास है,
क्योंकि तुझसे पहले भी जी रहा था, पर तेरे बाद...अब ‘ज़िंदा’ हूँ।


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