💔 दिल तोड़ देने वाली शायरी –💔
1.
तुमने मेरा हाथ थामा जैसे साथ कभी छूटेगा नहीं,
अब देखो, मैं अकेला हूँ, और तुम्हारा कोई निशान भी नहीं।
वो वादे जो चाँदनी रातों में किए थे,
अब सन्नाटों में खो गए, जैसे कभी थे ही नहीं।
2.
तुमने कहा था, “हमेशा तुम्हारा रहूँगा,”
अब तुम्हारा नाम भी ज़ख़्म दे रहा है।
एक मुस्कान में तुम दूर चले गए,
और मैं वहीं खड़ा रह गया, जैसे वक़्त रुक गया।
3.
तुम्हारा प्यार आग था, और मैं परवाना,
जलता रहा, फिर भी तुम्हारा दीवाना।
अब राख में ढूँढता हूँ अपनी कहानी,
क्या ये इश्क़ था या बस एक पुरानी कहानी?
4.
रातें अब चीख़ने लगी हैं,
तेरी यादें हर साए में बसने लगी हैं।
नींद आती है पर ख्वाब सताते हैं,
तेरे झूठे वादे फिर आँखों में आते हैं।
5.
मैं आज भी वहीं इंतज़ार करता हूँ,
जहाँ तूने आख़िरी बार मेरा नाम लिया था।
हवा तेरे अलविदा की गूंज लाती है,
और बारिश मेरे आँसू छुपा लेती है।
6.
क्यों सिखाया दिल को मुस्कुराना,
जब तुम्हें जाना ही था, बहाना बनाना?
क्यों अपनी जान से जोड़ा मेरा नाम,
फिर छोड़ दिया बेमौत, बिना इल्ज़ाम?
7.
हर रात तेरे नाम की तस्वीर बनाता हूँ,
सुबह होते ही मिटा देता हूँ।
जैसे तू आया और चला गया,
बिना कुछ कहे, बिना कोई निशान छोड़े।
8.
जिन रास्तों पर हम साथ चले थे,
अब वहाँ सिर्फ़ सन्नाटे और दर्द बचे हैं।
हर मोड़ पर तेरी आवाज़ गूंजती है,
लेकिन सामने तू नहीं, सिर्फ़ तन्हाई दिखती है।
9.
इश्क़ ऐसा नहीं था जैसा होना चाहिए,
ये तो वो ज़ख्म है जो हर पल गहरा हो गया।
तू एक अधूरी कविता थी मेरे लबों पर,
जिसे मैं कभी कह ना सका, और तू कभी समझ ना सका।
10.
लोग पूछते हैं, क्यों नहीं भूलता,
मैं मुस्कुरा कर कहता हूँ, “कुछ लोग नहीं भूलते।”
पर अंदर से रोज़ बिखरता हूँ,
तेरी यादों में हर रोज़ मरता हूँ।
11.
सोचा था तुझे पाया है,
पर अब लगता है खुद को खोया है।
तेरी खामोशी अब चुभने लगी है,
और मेरी सासें तुझसे रूठने लगी हैं।
12.
दुनिया आगे बढ़ गई, तू भी,
पर मैं वहीं हूँ, जहाँ तुझसे मिला था कभी।
वो लम्हें अब सिर्फ़ यादें हैं,
जो अब भी मेरी रूह में जिंदा हैं।
13.
क्या तुझे भी कभी मेरी कमी महसूस होती है?
या मैं बस एक बीता हुआ किस्सा हूँ?
तू सुकून में है, और मैं बर्बादी में,
तेरे बिना सब अधूरा सा लगता है।
14.
बता दे, क्या मैं बस एक खिलौना था?
या फिर तेरा वक़्त काटने का बहाना?
मैंने तो तुझमें खुदा देखा था,
और तूने मुझे तन्हा छोड़ दिया, बिना वजह।
अब तेरी यादें एक खंजर की तरह हैं,
हर दिन मेरी रूह को चीरती हैं।
लोग कहते हैं वक़्त मरहम होता है,
पर कुछ ज़ख्म वक़्त भी नहीं भर सकता।


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